बारिश के मौसम में इंसानों को ही नहीं फसलों को भी कई तरह के रोग होते हैं. खरीफ फसलों में प्रमुख सोयाबीन की फसल भी रोगग्रस्त हो गई है. मध्य प्रदेश और राजस्थान के कई जिलों में सोयाबीन की फसल पर पड़ रहे पीला मोजेक रोग की स्थिति का सही आकलन करने एवं प्रभावित क्षेत्र की जानकारी एकत्र करने के लिए नुकसानी सर्वे कार्य लगातार जारी है।
इस कार्य हेतु राजस्व विभाग एवं कृषि विभाग के संयुक्त दल गठित किए गए हैं जो सक्रिय रूप से खेतों में पहुंचकर फसल की वास्तविक स्थिति का आकलन कर रहे हैं। साथ ही प्रभावित गांवों में भ्रमण कर किसानों को इस रोग से बचाव एवं नियंत्रण के उपाय भी बताए जा रहे हैं। आखिर क्या है
पीला मोजेक रोग और आप कैसे अपनी फसलों को इस रोग से बचा सकते है. इस बारे में पढ़े यह विशेष लेख –
सोयाबीन का पीला मोजेक रोग
तिलहनी फसल सोयाबीन किसानों की आय का बड़ा स्रोत है। लेकिन इसकी खेती में कई रोगों का खतरा होता है, जिनमें से एक है पीला मोजेक रोग। यह रोग वायरस से फैलता है और यदि समय पर नियंत्रण न किया जाए तो फसल का उत्पादन 30% से 90% तक घट सकता है।
रोग का कारक:
यह रोग मूंगबीन येलो मोजेक वायरस (MYMV) के कारण होता है।सफेद मक्खी (Bemisia tabaci) इस वायरस को एक पौधे से दूसरे पौधे तक फैलाती है। गर्म और आर्द्र मौसम में सोयाबीन में इस रोग का फैलाव तेजी से होता है।
प्रमुख लक्षण
इस रोग में पत्तियों पर असमान पीले धब्बे दिखते हैं, जो धीरे-धीरे पूरी पत्ती को घेर लेते हैं।
इससे पत्तियों की बनावट में बदलाव होता है और पत्तियाँ खुरदरी, सिकुड़ी हुई और पतली हो जाती हैं।
रोगग्रस्त पौधे कमजोर हो जाते हैं और विकास रुक जाता है।
प्रभावित पौधों में फलन घटता है और बीज भी पूरी तरह नहीं बनते।
रोग नियंत्रण
सफेद मक्खी का नियंत्रण:
खेत में पीले चिपचिपे जाल (Yellow Sticky Traps) लगाएं ताकि सफेद मक्खियाँ फंस जाएं। साथ ही कृषि वैज्ञानिकों की अनुशंसा के आधार पर थायोमिथोक्सम या इमिडाक्लोप्रिड आधारित कीटनाशकों का छिड़काव करें।
फसल की स्वच्छता बनाए रखें:
किसान रोगग्रस्त पौधों को खेत से तुरंत हटाएं और नष्ट करें। फसलों के बीच में अनावश्यक रूप से उगे खरपतवारों को हटाएं, जो वायरस के लिए वैकल्पिक मेज़बान बन सकती हैं।
रोग प्रतिरोधी किस्मों का प्रयोग करें:
सोयाबीन की JS 95-60, NRC 37, RVS 2001-4 जैसी प्रतिरोधक किस्में इस रोग के विरुद्ध उपयोगी पाई गई हैं। किसान भाई कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार इन किस्मों को लगा सकते हैं.
जैविक उपाय अपनाएं:
इस रोग से फसलों की सुरक्षा के लिए जैविक उपाय भी अपना सकते हैं. नीम का तेल (5 मिली/लीटर पानी) का छिड़काव प्राकृतिक रूप से सफेद मक्खी को नियंत्रित करता है। साथ ही ट्राइकोडर्मा, बवेरिया बेसियाना जैसे जैव कीटनाशकों का प्रयोग भी लाभकारी है
पीला मोजेक एक बार लगने पर पूरी फसल को नष्ट कर सकता है। इसलिए सही समय पर रोकथाम जरूरी है। यदि किसान जैविक, यांत्रिक और रासायनिक उपायों का संतुलित उपयोग करें, तो इस रोग को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
सोयाबीन का पीला मोजेक रोग किसानों के लिए एक गंभीर समस्या है, लेकिन उचित जानकारी और प्रबंधन से इससे बचा जा सकता है। समय पर पहचान, वाहक कीटों का नियंत्रण, और रोग-प्रतिरोधी बीजों का प्रयोग इस रोग से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम कर सकते हैं। शासन एवं प्रशासन भी वास्तविक नुकसान का सही सर्वे कर कार्यवाही करने का प्रयास कर सकते हैं, ताकि प्रभावित कृषकों को समय पर राहत और आवश्यक सहयोग मिल सके।

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