Village of Flower- जानिए क्यों कहते है फूलों का गाँव

Village of Flower

रंग बिरंगे फूल सदा ही मन को लुभाते है.चाहे देवताओं के सिर पर चढ़ाना हो या विवाह समारोह मे उपयोग करना हो या पर्व-त्यौंहारों के लिए बनाना हो बंदनवार, फूलों की ख़ुश्बू से घर-आँगन महकता रहता है. देश का एक गांव ऐसा भी है जहाँ बस फूलों की खेती की जाती है. जानिए इस गांव के बारे में और पढ़े ये लेख-

क्या है गाँव का नाम –

बाबा बैद्यनाथ की नगरी देवघर में रोज हज़ारों पर्यटक आते है. देवघर मुख्यालय से 7 कि.मी.की दूरी पर मोहनपुर प्रखंड का मलहरा गाँव स्थित है. इस गाँव में 3000 लोग रहते है, इनमें से हर घर से कोई ना कोई फूलों की खेती करता है. इस गाँव के किसानों की आर्थिक समृद्धि का आधार गेंदे के फूलों की खेती ही है.

फूलों की खेती –

मलहरा के लगभग 3000 किसान गेंदे के फूलों की खेती करते हैं. ये फूल बाबा वैद्यनाथ के मंदिर में चढ़ाये जाते है. रोज हज़ारों दर्शनार्थी बाबा के मंदिर में आते है।  इस कारण यहाँ के किसानों की आय में वृद्धि होती रहती है.

flowers

सरकार से क्या चाहिए सहायता –

किसानों को गेंदे के फूलों के बीज कलकत्ता से मंगवाने पड़ते है।  इसमें अधिक खर्चा हो जाता है. इसलिए गाँव के किसानों की मांग है कि, सरकार सहयोग करें और सस्ती दरों पर बीज उपलब्ध करवाए। सरकार इस गाँव को फ्लावर क्लस्टर के रूप में विकसित करें। तकनीकी सहायता, मार्केटिंग और सब्सिडी की सुविधाएं उपलब्ध करवाएं तो गाँव के किसान गेंदे के अलावा अन्य फूलों की खेती भी कर सकते है और देश के दूसरे राज्यों में भी फूलों को बेच सकते है.

युवाओं का क्या है कहना –

गाँव के युवाओं का कहना है कि, अब हम सिर्फ मंदिरों से अर्जित होने वाली कमाई पर निर्भर नहीं रहना चाहते। हम चाहते है कि, मलहरा फूलों की खेती के मामले में सिर्फ झारखण्ड के लिए ही रोल मॉडल ना बने बल्कि देश भर के लिए रोल मॉडल बनें। इसके लिए किसानों की नई पीढ़ी को सही दिशा और मार्गदर्शन के साथ ही सरकार द्वारा सहयोग भी प्राप्त हो.

किसान भाइयों आप भी फूलों की खेती को बनाएं कमाई का जरिया और फूलों के गाँव के किसानो से प्रेरणा लेकर अपनी आर्थिक समृद्धि का आधार स्वयं रचे.

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अपनी कलम और प्रखर वाणी के दम पर पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी अनूठी पहचान बनाने वाली श्रुति प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, ब्रॉडकास्ट और डिजिटल मीडिया में कार्य करने का 11 वर्षों का अनुभव रखती है. इन्होंने होलकर विज्ञान महाविद्यालय से बायोटेक्नोलॉजी में विशेषज्ञता के साथ बी.एस.सी.की है. कुशल मीडिया और कम्युनिकेशन प्रोफेशनल श्रुति ने पत्रकारिता और जनसंचार में एम.ए., पत्रकारिता और जनसंचार अध्ययनशाला देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर, मध्यप्रदेश से किया है. रिपोर्टर के रूप में अपने करियर की शुरुआत करने वाली श्रुति ने अर्टिकल राइटर, कंटेंट राइटर, एंकर, स्क्रिप्ट राइटर, रेडियो जॉकी, ब्यूरो चीफ, समाचार सम्पादक, संपादक, कंटेंट मैनेजर, नेशनल हेड - इवेंट्स और जनसम्पर्क पदों पर रहते हुए अपनी कार्यकुशलता का परिचय दिया है. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण आदि समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में कार्य करने के साथ, आकाशवाणी (आल इंडिया रेडियो), कृषि जागरण, ग्रीन टी. वी., आर्यन टी. वी. नेशनल (साधना मीडिया प्राइवेट लिमिटेड, नोएडा )में भी कार्य किया है. लेखक और कवि होने के साथ ही श्रुति एंकर और व्यक्तित्व विकास प्रशिक्षक भी है. वर्तमान में एग्री संपर्क (डिजिटल संपर्क, नोएडा) में मुख्य संपादक और नेशनल हेड - इवेंट्स और जनसम्पर्क के पद पर कार्यरत हैं

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