प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना

खेती के लिए सबसे आवश्यक है पानी. सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी की व्यवस्था हो तों ही किसानों के खेत लहलहा सकते हैं.  इसके लिए शुरू की गई थी प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) जिसके लिए कहा गया “प्रति बूंद अधिक फसल” (Per Drop More Crop). आखिर क्या है ये योजना और किसान कैसे ले सकते हैं इस योजना का लाभ, जानने के लिए पढ़े यह लेख 

प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना योजना का मुख्य फोकस सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली (ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई) को प्रोत्साहन देना है, जिससे किसानों को कम पानी में अधिक उपज प्राप्त हो सके। साथ ही, यह योजना जल संरक्षण, जल प्रबंधन और छोटे स्तर के जल भंडारण को भी बढ़ावा देती है।

क्या है उद्देश्य-

  1.  सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों के अंतर्गत क्षेत्र को बढ़ाना ताकि देश में जल उपयोग दक्षता में सुधार हो सके।
  2. फसलों की उत्पादकता और किसानों की आय को सटीक जल प्रबंधन द्वारा बढ़ाना।
  3. गन्ना, केला, कपास जैसे जल-गहन फसलों में सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों को बढ़ावा देना और खाद्य फसलों में भी इनका विस्तार करना।
  4. फर्टिगेशन (खाद + सिंचाई) के लिए सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों का प्रभावी उपयोग।
  5. जल-संकटग्रस्त और भूजल की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा देना।
  6. ट्यूबवेल/रिवर-लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं को सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों से जोड़ना ताकि ऊर्जा का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
  7. अन्य सरकारी योजनाओं/कार्यक्रमों से सामंजस्य और समन्वय स्थापित करना, जैसे कि जल स्रोतों का उपयोग, सौर ऊर्जा को सिंचाई में जोड़ना आदि।
  8. कृषि और बागवानी में सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों के प्रचार, विकास और वैज्ञानिक ज्ञान का प्रसार।
  9. स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन, खासकर बेरोजगार युवाओं के लिए, ताकि वे सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों की स्थापना और रखरखाव में शामिल हो सकें।

इस योजना की विशेषताएँ –

यह योजना निश्चित सिंचाई (Assured Irrigation) के लिए जल स्रोतों के निर्माण पर केंद्रित है, साथ ही संरक्षण सिंचाई (Protective Irrigation) के लिए वर्षा जल को खेत स्तर पर संग्रहित करने पर बल देती है – जिसे ‘जल संचय’ और ‘जल सिंचन’ कहा जाता है।

सूक्ष्म सिंचाई इस योजना का अभिन्न हिस्सा है, जिससे खेत स्तर पर जल उपयोग दक्षता को अधिकतम किया जा सके।

कैसे किया जाता है कार्यन्वयन –

इस योजना के चार प्रमुख घटक हैं:

  • त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (Accelerated Irrigation Benefit Programme – AIBP)
  • प्रति बूंद अधिक फसल (Per Drop More Crop – PDMC)
  • हर खेत को पानी (Har Khet Ko Pani)
  • वाटरशेड विकास (Watershed Development)

“प्रति बूंद अधिक फसल” में निम्नलिखित गतिविधियाँ शामिल हैं:

  1. सूक्ष्म स्तर के जल भंडारण ढांचे
  2. जल के कुशल परिवहन एवं वितरण
  3. सटीक सिंचाई प्रणालियाँ
  4. अतिरिक्त लागत के लिए सहायता (MGNREGA की सीमा से अधिक)
  5. द्वितीयक भंडारण, जल उठाने के उपकरण
  6. विस्तार गतिविधियाँ, समन्वय एवं प्रबंधन

यह सभी कार्य कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (DAC&FW) द्वारा लागू किए जाते हैं।

क्या कार्य है नोडल विभाग का –

  1. योजना के अंतिम उद्देश्य – हर खेत तक जल की कुशल आपूर्ति और कृषि उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि को ध्यान में रखते हुए, राज्यों में कृषि विभाग को नोडल विभाग बनाया जा सकता है।
  2. हालांकि, राज्य सरकारें अपनी संस्थागत संरचना और विभागीय दायित्वों के आधार पर कोई भी उपयुक्त विभाग चुन सकती हैं।
  3. राज्य सरकारों को स्वतंत्रता है कि वे Per Drop More Crop के क्रियान्वयन के लिए एक समर्पित एजेंसी/विभाग नियुक्त करें।
  4. मंत्रालय और राज्य सरकार के बीच सभी संचार नोडल विभाग के माध्यम से होना वांछनीय है।

किसानों को क्या लाभ मिलेंगे –

वित्तीय सहायता: किसानों को सूक्ष्म सिंचाई (Micro Irrigation) के तहत सिंचाई के उपकरणों की स्थापना के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।

कैसे ले सकते हैं लाभ –

ड्रिप या स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली की स्थापना: चयनित फसलों के लिए किसानों के खेतों में ड्रिप या स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली स्थापित की जाती है।

स्थापना की सुविधा: सिंचाई प्रणाली की स्थापना किसान स्वयं कर सकते हैं या किसी मान्यता प्राप्त सूक्ष्म सिंचाई कंपनी की सहायता ले सकते हैं।

सब्सिडी का पैटर्न (Subsidy Pattern): लघु और सीमांत किसान: 55% अनुदान अन्य किसान: 45% अनुदान

फंडिंग पैटर्न:

  1. सामान्य राज्यों में: केंद्र और राज्य सरकार के बीच 60:40
  2. उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों में: 90:10
  3. केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) के लिए: 100% केंद्र सरकार द्वारा
  4. डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT):
  5. अनुदान की राशि प्रत्यक्ष रूप से किसानों के बैंक खाते में भेजी जाती है।
  6. अन्य हस्तक्षेपों के अंतर्गत अतिरिक्त लाभ 
  7. व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर पर जल संचयन संरचनाएं
    जल उठाने के उपकरण (Water Lifting Devices)
  8. फार्म पोंड (Farm Pond) की खुदाई
  9. जल संप्रेषण की दक्षता हेतु अन्य संसाधन

योजना के लिए पात्रता-आवेदनकर्ता भारत का नागरिक होना चाहिए।

  • सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सभी किसान इस योजना का लाभ ले सकते हैं।
  • प्रति लाभार्थी अधिकतम 5 हेक्टेयर भूमि तक ही सब्सिडी दी जाएगी।
  • किसान को केवल BIS (भारतीय मानक ब्यूरो) द्वारा प्रमाणित उपकरणों/घटकों की ही खरीद करनी होगी।
  • योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए आधार विवरण अनिवार्य है और योजना डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से लागू की जाती है।

 तों किसान भाई अवश्य लें इस योजना का लाभ और बेहतर खेती करके हो जाएं मालामाल…

यदि आप इस विषय में विस्तृत जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो कृपया इस वेबसाइट पर विज़िट करें।
Pradhan Mantri Krishi Sinchayee Yojana https://share.google/gMIUVsfgsx5bY5vkR

About श्रुति जोशी 35 Articles
अपनी कलम और प्रखर वाणी के दम पर पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी अनूठी पहचान बनाने वाली श्रुति प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, ब्रॉडकास्ट और डिजिटल मीडिया में कार्य करने का 11 वर्षों का अनुभव रखती है. इन्होंने होलकर विज्ञान महाविद्यालय से बायोटेक्नोलॉजी में विशेषज्ञता के साथ बी.एस.सी.की है. कुशल मीडिया और कम्युनिकेशन प्रोफेशनल श्रुति ने पत्रकारिता और जनसंचार में एम.ए., पत्रकारिता और जनसंचार अध्ययनशाला देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर, मध्यप्रदेश से किया है. रिपोर्टर के रूप में अपने करियर की शुरुआत करने वाली श्रुति ने अर्टिकल राइटर, कंटेंट राइटर, एंकर, स्क्रिप्ट राइटर, रेडियो जॉकी, ब्यूरो चीफ, समाचार सम्पादक, संपादक, कंटेंट मैनेजर, नेशनल हेड - इवेंट्स और जनसम्पर्क पदों पर रहते हुए अपनी कार्यकुशलता का परिचय दिया है. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण आदि समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में कार्य करने के साथ, आकाशवाणी (आल इंडिया रेडियो), कृषि जागरण, ग्रीन टी. वी., आर्यन टी. वी. नेशनल (साधना मीडिया प्राइवेट लिमिटेड, नोएडा )में भी कार्य किया है. लेखक और कवि होने के साथ ही श्रुति एंकर और व्यक्तित्व विकास प्रशिक्षक भी है. वर्तमान में एग्री संपर्क (डिजिटल संपर्क, नोएडा) में मुख्य संपादक और नेशनल हेड - इवेंट्स और जनसम्पर्क के पद पर कार्यरत हैं

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