Post Harvest Management : फसल कटाई के बाद प्रबंधन कैसे करें

Post Harvest Management फसल कटाई के बाद प्रबंधन कैसे करें

किसान खून – पसीना एक करके फसल उगते हैं. किसानों की मेहनत से जब फसल तैयार होती है, तब उसकी सही देखभाल और भंडारण अत्यंत आवश्यक हो जाता है। यदि फसल कटाई के बाद उसका उचित प्रबंधन न किया जाए, तो उत्पादन का बड़ा हिस्सा नष्ट हो सकता है। किसान भाई,”फसल कटाई के बाद प्रबंधन” कैसे कर सकते हैं, इस बारे में पढ़े यह लेख –

पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट क्या है?

फसल की गुणवत्ता बनाए रखने, बर्बादी को रोकने और बाजार से फसल का उचित मूल्य प्राप्त करने के लिए, फसलों की कटाई के बाद उनका प्रबंधन ज़रूर हैं. फसल कटाई के बाद की सभी प्रक्रियाओं जैसे – सफाई, छंटाई, सुखाना, पैकिंग, भंडारण और परिवहन को पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट कहा जाता है। 

फसल कटाई के बाद नुकसान के कारण

असमय कटाई करने यानि समय से पहले या देर से फसल काटने पर गुणवत्ता खराब हो जाती है। यदि फसलों का भण्डारण  गलत तरीके से हो तो नमी या कीटों के कारण अनाज खराब हो जाता है. कभी  सही पैकिंग न होने से परिवहन के समय फसल टूट-फूट जाती है। यदि प्रसंस्करण की कमी हो यानि फल और सब्जियों को सही तरीके से संसाधित न किया जाए, तो वो जल्दी खराब हो जाते हैं।

फसल कटाई प्रबंधन के प्रमुख चरण

कटाई (Harvesting) – सही समय पर कटाई करना बहुत जरूरी है। इससे उपज की गुणवत्ता बनी रहती है।

छंटाई और ग्रेडिंग (Sorting and Grading) – खराब और अच्छे उत्पादों को अलग किया जाता है जिससे बाजार में अच्छा दाम मिलता है।

साफ-सफाई (Cleaning) – मिट्टी, धूल और कीड़ों को हटाना जरूरी होता है।

सुखाना (Drying) – अनाजों को सही मात्रा में सुखाना जरूरी है ताकि उनमें नमी न रहे।

पैकिंग (Packaging) – फसल की सुरक्षा के लिए मजबूत और टिकाऊ पैकिंग करना जरूरी है।

भंडारण (Storage) – अनाजों को सुरक्षित और सूखी जगह पर रखना चाहिए ताकि वे लंबे समय तक खराब न हों।

परिवहन (Transportation) – फसल को बाजार तक सुरक्षित तरीके से पहुँचाना भी आवश्यक है।

 तकनीकों के उपयोग से लाभ

फसल कटाई प्रबंधन के लिए तकनीको का प्रयोग करनेऔर कृषि यन्त्रों का प्रयोग करने से, फसल की बर्बादी कम होती है, किसानों को उचित मूल्य मिलता है, फसल की गुणवत्ता बनी रहती है  और उत्पादों का निर्यात संभव हो पाता है।इससे किसानों की आय में वृद्धि होती है।

फसल उगाने के बाद उसका सही प्रबंधन उतना ही जरूरी है जितना उत्पादन करना। किसानों यदि आप फसल कटाई प्रबंधन को गंभीरता से अपनाएं तो आपको अधिक लाभ मिल सकता है और आप खाद्य अपव्यय को भी कम कर सकते है।

About श्रुति जोशी 35 Articles
अपनी कलम और प्रखर वाणी के दम पर पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी अनूठी पहचान बनाने वाली श्रुति प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, ब्रॉडकास्ट और डिजिटल मीडिया में कार्य करने का 11 वर्षों का अनुभव रखती है. इन्होंने होलकर विज्ञान महाविद्यालय से बायोटेक्नोलॉजी में विशेषज्ञता के साथ बी.एस.सी.की है. कुशल मीडिया और कम्युनिकेशन प्रोफेशनल श्रुति ने पत्रकारिता और जनसंचार में एम.ए., पत्रकारिता और जनसंचार अध्ययनशाला देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर, मध्यप्रदेश से किया है. रिपोर्टर के रूप में अपने करियर की शुरुआत करने वाली श्रुति ने अर्टिकल राइटर, कंटेंट राइटर, एंकर, स्क्रिप्ट राइटर, रेडियो जॉकी, ब्यूरो चीफ, समाचार सम्पादक, संपादक, कंटेंट मैनेजर, नेशनल हेड - इवेंट्स और जनसम्पर्क पदों पर रहते हुए अपनी कार्यकुशलता का परिचय दिया है. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण आदि समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में कार्य करने के साथ, आकाशवाणी (आल इंडिया रेडियो), कृषि जागरण, ग्रीन टी. वी., आर्यन टी. वी. नेशनल (साधना मीडिया प्राइवेट लिमिटेड, नोएडा )में भी कार्य किया है. लेखक और कवि होने के साथ ही श्रुति एंकर और व्यक्तित्व विकास प्रशिक्षक भी है. वर्तमान में एग्री संपर्क (डिजिटल संपर्क, नोएडा) में मुख्य संपादक और नेशनल हेड - इवेंट्स और जनसम्पर्क के पद पर कार्यरत हैं

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