Post Harvest Management : फसल कटाई प्रबंधन के लिए आवश्यक कृषि यंत्र

Post Harvest Management : फसल कटाई प्रबंधन के लिए आवश्यक कृषि यंत्र

भारत में प्रतिवर्ष लाखों टन अनाज, फल, और सब्जियों का उत्पादन होता है। लेकिन उत्पादन के बाद फसलों का खराब होना एक प्रमुख समस्या है। इसे रोकने के लिए फसल कटाई के बाद की प्रक्रिया का सही प्रबंधन बेहद आवश्यक है। इस प्रक्रिया में आधुनिक कृषि यंत्रों की अहम भूमिका है। दुनियां पारम्परिक कृषि यंत्रों से, आधुनिक कृषि यंत्रों की ओर अग्रसर हो चुकी है. इस लेख में जानिए, पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट में उपयोग होने वाले प्रमुख कृषि यंत्रों के बारे में और साथ ही जानें, कैसे आधुनिक तकनीकें जैसे IoT और AI आज के किसानों की फसलों की पैदावार बढ़ा रही हैं-

फसल कटाई प्रबंधन

भारत जैसे कृषि प्रधान देश में फसल उत्पादन के बाद उसका सही प्रबंधन जरूरी होता है ताकि फसल की बर्बादी कम हो और किसानों को उचित मूल्य मिल सके। इस प्रक्रिया को फसल कटाई प्रबंधन कहा जाता है।

फसल कटाई प्रबंधन प्रक्रिया

पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट की प्रक्रिया में कटाई के बाद फसल की सफाई, ग्रेडिंग, सुखाना, पैकेजिंग, भंडारण और परिवहन शामिल होते हैं। इन सभी चरणों में समय और संसाधनों की बचत के लिए आधुनिक कृषि यंत्रों का प्रयोग बढ़ता जा रहा है। पारम्परिक और आधुनिक कृषि यंत्रों के बारे में जानिए

परंपरागत और आधुनिक कृषि यंत्र

  1. थ्रेशर (Threshers):

          थ्रेशर मुख्य रूप से अनाज को भूसे से अलग करने के लिए उपयोग किया जाता है। पहले इसे मैन्युअल तरीके से किया            जाता था, लेकिन अब ट्रैक्टर चालित थ्रेशर ने इस कार्य को बहुत आसान और तेज़ बना दिया है।

Post Harvest Management

  1. क्लीनिंग और ग्रेडिंग मशीन:

          कटाई के बाद फसल को साफ करने और गुणवत्ता के अनुसार वर्गीकरण करने के लिए ये मशीनें अत्यंत उपयोगी हैं।              इससे बाजार में बेहतर मूल्य मिलता है।

  1. ड्रायर (Dryers):

        आधुनिक मैकेनिकल ड्रायर धान, गेहूं या मक्का जैसी फसलों को सुखाने के लिए, किसानों को मौसम पर निर्भर रहने से            मुक्त कर रहे हैं। इससे फसलों की नमी नियंत्रित रहती है और भंडारण में नुकसान कम होता है।

  1. कोल्ड स्टोरेज यूनिट्स और मिनी कोल्ड स्टोरेज:

        तापमान नियंत्रित भंडारण फल, सब्जियां और डेयरी उत्पादों के लिए बेहद आवश्यक है। अब छोटे किसानों के लिए                मिनीकोल्ड स्टोरेज की तकनीक उपलब्ध है जो सौर ऊर्जा से भी चल सकते हैं।

  1. पैकेजिंग मशीन:

        फसलों को बाज़ार भेजने से पहले उनकी सही पैकेजिंग बहुत जरूरी होती है। आधुनिक पैकेजिंग मशीनें न केवल समय            बचाती हैं, बल्कि उत्पाद की गुणवत्ता और आकर्षण भी बनाए रखती हैं।

आधुनिक नए और स्मार्ट यंत्र

  1. मोबाइल पोस्ट हार्वेस्ट यूनिट्स:

          ये चलित इकाइयाँ खेतों तक पहुंचकर सफाई, सुखाने और ग्रेडिंग जैसे कार्य कर सकती हैं। इससे छोटे और मध्यम                  किसानों को लाभ मिल रहा है।

  1. IoT आधारित स्टोरेज मॉनिटरिंग:

         इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) से जुड़े यंत्र संग्राहक की नमी, तापमान और गैस स्तर का निरीक्षण करते हैं और समय रहते             अलर्ट भेजते हैं।

  1. AI आधारित ग्रेडिंग सिस्टम:

         वर्तमान समय AI का है. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग करके अब फलों और सब्जियों की गुणवत्ता की पहचान                    करना और वर्गीकरण करना और भी सटीक हो गया है।

किसानों को आधुनिक यंत्रों को अपनाने हेतू  प्रेरित करने के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकारों द्वारा कई योजनाए चलाई जा रही है साथ ही सब्सिडी भी प्रदान की जा रही है। जिनका लाभ किसान भाई ले सकते हैं. 

फसल कटाई प्रबंधन में कृषि यंत्रों का उपयोग न केवल फसलों की बर्बादी को रोकता है, बल्कि किसानों की आय में भी इज़ाफ़ा करता है। जैसे-जैसे देश का किसान तकनीको का प्रयोग करेगा और नवाचार करने से हिचकिचाएगा नहीं, वैसे -वैसे भारत का कृषि क्षेत्र और भी सशक्त होता जाएगा।
भविष्य में तकनीक के साथ तालमेल बनाकर आप सब किसान भाई, न केवल खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं, बल्कि अपनी समृद्धि का मार्ग भी प्रशस्त कर सकते हैं. वास्तव में तकनीक से बदलेगा किसानों  का भविष्य।

About श्रुति जोशी 35 Articles
अपनी कलम और प्रखर वाणी के दम पर पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी अनूठी पहचान बनाने वाली श्रुति प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, ब्रॉडकास्ट और डिजिटल मीडिया में कार्य करने का 11 वर्षों का अनुभव रखती है. इन्होंने होलकर विज्ञान महाविद्यालय से बायोटेक्नोलॉजी में विशेषज्ञता के साथ बी.एस.सी.की है. कुशल मीडिया और कम्युनिकेशन प्रोफेशनल श्रुति ने पत्रकारिता और जनसंचार में एम.ए., पत्रकारिता और जनसंचार अध्ययनशाला देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर, मध्यप्रदेश से किया है. रिपोर्टर के रूप में अपने करियर की शुरुआत करने वाली श्रुति ने अर्टिकल राइटर, कंटेंट राइटर, एंकर, स्क्रिप्ट राइटर, रेडियो जॉकी, ब्यूरो चीफ, समाचार सम्पादक, संपादक, कंटेंट मैनेजर, नेशनल हेड - इवेंट्स और जनसम्पर्क पदों पर रहते हुए अपनी कार्यकुशलता का परिचय दिया है. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण आदि समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में कार्य करने के साथ, आकाशवाणी (आल इंडिया रेडियो), कृषि जागरण, ग्रीन टी. वी., आर्यन टी. वी. नेशनल (साधना मीडिया प्राइवेट लिमिटेड, नोएडा )में भी कार्य किया है. लेखक और कवि होने के साथ ही श्रुति एंकर और व्यक्तित्व विकास प्रशिक्षक भी है. वर्तमान में एग्री संपर्क (डिजिटल संपर्क, नोएडा) में मुख्य संपादक और नेशनल हेड - इवेंट्स और जनसम्पर्क के पद पर कार्यरत हैं

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