Onion farming : प्याज़ की खेती को बनाएं लाभकारी व्यवसाय

रसोई में सबसे ज़रूरी कुछ है तों वो है प्याज़. सब्ज़ियों और व्यंजनों का स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ यह औषधीय गुणों से भी भरपूर है। इसलिए ज़ब रसोई में प्याज़ खत्म हो जाता है तों गृहणियों का मन भोजन बनाने में नहीं लगता.इतने ज़रूरी प्याज़ की खेती किसानों के लिए है फायदे का सौदा. तों किसान भाई कैसे कर सकते हैं प्याज़ की खेती और इसकी प्रक्रिया क्या है ये जानने के लिए पढ़े ये लेख –

भारत प्याज उत्पादन में विश्व के अग्रणी देशों में से एक है और महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात तथा उत्तर प्रदेश इसके प्रमुख उत्पादक राज्य हैं।

जलवायु और भूमि 

प्याज की खेती ठंडी और शुष्क जलवायु में अधिक सफल रहती है।प्याज की फसल के लिए 13°C से 25°C तक का तापमान उपयुक्त होता है।

इसकी खेती के लिए बलुई दोमट या दोमट मिट्टी जिसमें जलनिकासी अच्छी हो, सबसे आदर्श मानी जाती है।मिट्टी का pH मान 6.0 से 7.5 तक उत्तम होता है।

बीज की कौन -सी किस्में है लाभदायी 

भारत में प्याज़ की प्रमुख किस्में अरका कल्याण, अरका निकेतन, पूसा रेड, नसिक रेड, पूसा मधुना, NHRDF रेड आदि है. प्याज़ की खेती, खरीफ और रबी दोनों मौसम में की जा सकती है, परंतु रबी मौसम में प्याज की गुणवत्ता और भंडारण क्षमता अधिक होती है।

कैसे करें बुवाई

प्याज़ की खेती में नर्सरी की तैयारी करते हैं.सबसे पहले 8–10 हफ्ते पुरानी पौध तैयार की जाती है।पौध तैयार होने के बाद खेत में कतारों में रोपाई की जाती है। कतार से कतार की दूरी 15–20 से.मी. और पौधे से पौधे की दूरी 8–10 से.मी. रखी जाती है। प्याज़ की खेती में एक हेक्टेयर क्षेत्र के लिए लगभग 10–12 किलोग्राम बीज पर्याप्त होता है।

सिंचाई और खाद प्रबंधन है ज़रूरी 

प्याज की फसल को नियमित अंतराल पर हल्की सिंचाई की आवश्यकता होती है।प्रारंभिक अवस्था में अधिक नमी की जरूरत होती है, लेकिन याद रखिएगा कि,कंद बनने के समय अधिक पानी नुकसानदायक होता है।

इसके लिए गोबर की सड़ी हुई खाद 20–25 टन प्रति हेक्टेयर उपयोग कर सकते हैं. नत्रजन, फॉस्फोरस और पोटाश का संतुलित प्रयोग फायदे कारक  रहेगा.

रोग और कीट नियंत्रण है ज़रूरी 

प्याज़ की फसल में जड़ गलन, पर्पल ब्लॉच और थ्रिप्स रोग आमतौर पर होते है. इनके नियंत्रण के लिए उचित फफूंदनाशी और कीटनाशी का छिड़काव करना चाहिए। जैविक तरीके से खेती करने वाले किसान नीम के तेल और जैविक घोल का प्रयोग भी कर सकते है.

कटाई और भण्डारण 

प्याज की फसल 90–120 दिनों में तैयार हो जाती है।प्याज़ की पत्तियाँ पीली होकर नीचे झुकने लगें, तब फसल काटनी चाहिए। प्याज़ के कंदों को 2–3 दिनों तक धूप में सुखाकर भंडारण करना उचित होता है। प्याज को सड़न से बचाने के लिए हवादार गोदामों में जालीदार बोरियों में रखना चाहिए. प्याज की खेती किसानों को कम समय में अच्छी आय देती है. प्याज की मांग पूरे वर्ष बनी रहती है, जिससे विपणन में समस्या नहीं आती। प्याज की खेती एक लाभकारी और स्थायी कृषि व्यवसाय है।

सही भूमि, उचित जलवायु और वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर किसान कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। तों किसान भाइयों, सरकार द्वारा दी जाने वाली बीज, खाद और प्रशिक्षण की सुविधाएँ लेकर  आप प्याज़ की खेती से लाभ कमा सकते हैं.

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अपनी कलम और प्रखर वाणी के दम पर पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी अनूठी पहचान बनाने वाली श्रुति प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, ब्रॉडकास्ट और डिजिटल मीडिया में कार्य करने का 11 वर्षों का अनुभव रखती है. इन्होंने होलकर विज्ञान महाविद्यालय से बायोटेक्नोलॉजी में विशेषज्ञता के साथ बी.एस.सी.की है. कुशल मीडिया और कम्युनिकेशन प्रोफेशनल श्रुति ने पत्रकारिता और जनसंचार में एम.ए., पत्रकारिता और जनसंचार अध्ययनशाला देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर, मध्यप्रदेश से किया है. रिपोर्टर के रूप में अपने करियर की शुरुआत करने वाली श्रुति ने अर्टिकल राइटर, कंटेंट राइटर, एंकर, स्क्रिप्ट राइटर, रेडियो जॉकी, ब्यूरो चीफ, समाचार सम्पादक, संपादक, कंटेंट मैनेजर, नेशनल हेड - इवेंट्स और जनसम्पर्क पदों पर रहते हुए अपनी कार्यकुशलता का परिचय दिया है. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण आदि समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में कार्य करने के साथ, आकाशवाणी (आल इंडिया रेडियो), कृषि जागरण, ग्रीन टी. वी., आर्यन टी. वी. नेशनल (साधना मीडिया प्राइवेट लिमिटेड, नोएडा )में भी कार्य किया है. लेखक और कवि होने के साथ ही श्रुति एंकर और व्यक्तित्व विकास प्रशिक्षक भी है. वर्तमान में एग्री संपर्क (डिजिटल संपर्क, नोएडा) में मुख्य संपादक और नेशनल हेड - इवेंट्स और जनसम्पर्क के पद पर कार्यरत हैं

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