GST Update : किसानों को मिली राहत,  ट्रैक्टर हुए सस्ते और किफायती हुए उर्वरक

किसानों के लिए कृषि उपयोगी सामग्री का सस्ता मिलना एक चुनौती थी क्योंकि कृषि उपकरणों, उर्वरकों आदि पर वस्तु एवं सेवा कर अधिक होने से ये सब महंगे मिल रहे थे. जिससे निश्चित ही खेती की लागत ज्यादा और मुनाफा कम हो रहा था. इसीलिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जीएसटी में बड़ी राहत दी है. टैक्स में किए गए बदलावों में किसानों, डेयरी उद्योग, एफपीओ, मछली पालको के साथ ही स्व सहायता समूहों का भी ध्यान रखा गया है तो आप सबके लिए क्या ज़रूरी बदलाव किए गए है, जानिए इस लेख में –

कृषि यंत्रों व सिंचाई यंत्रों में राहत

जीएसटी काउंसिल की मीटिंग में टैक्स स्लैब को लेकर बड़े बदलाव किए गए हैं. कृषि यंत्रों के बढ़ते दाम किसानों के माथे पर चिंता की लकीरे खींच देते हैं इसीलिए जीएसटी स्लैब में बदलाव के बाद 1800 सीसी से कम वाले ट्रैक्टरों पर जीएसटी घटकर 5 फीसदी कर दी गयी है. इसी के साथ ट्रैक्टर के टायर और ट्यूब, ट्रैक्टरों के लिए हाइड्रोलिक पंप और कई अन्य ट्रैक्टर पुर्जे भी सस्ते हो जाएंगे. सरकार का यह फैसला छोटे किसानों को राहत देने वाला है.

वही सिंचाई यंत्रो के मामले में सरकार की और से GST में किए गए बदलावों में ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणालियों को बढ़ावा दिया जा रहा है. साथ ही 15 एचपी से कम वाले फिक्स्ड स्पीड डीजल इंजन, कटाई या थ्रेसिंग मशीनरी, कंपोस्टिंग मशीन आदि को भी 12 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी के टैक्स स्लैब में लाया गया है. जिसके बाद इनकी कीमतों में बड़ी कटौती होने की सम्भावना है.

सस्ते हुए उर्वरक

उर्वरक किफायती रहें और उनकी मांग स्थिर रहे, साथ ही कंपनियां किसानों पर उर्वरकों की कीमतों में वृद्धि का वजन ना डाल पाएं इस उद्देश्य से उर्वरक उत्पादन के लिए प्रमुख कच्चे माल की दरों  में भी कटौती की गई है. अमोनिया, सल्फ्यूरिक एसिड और नाइट्रिक एसिड जैसी चीजों को 18 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी टैक्स स्लैब में डाला गया है. इसके अलावा 12 जैव कीटनाशकों और सूक्ष्म पोषक तत्वों पर भी 12 फीसदी जीएसटी हटाकर 05 फीसदी स्लैब लागू किया गया है.

और क्या मिली है छूट 

एफपीओ और लघु उद्योगों को फायदा देने के लिए जहाँ एक ओर फल-सब्जियों को प्रोसेस करके बनाई गई चीजों को भी 12 फीसदी टैक्स के दायरे से निकालकर 05 फीसदी टैक्स के दायरे में लाया गया है. वहीं दूसरी ओर पोषण सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए रोजमर्रा के इस्तेमाल में आने वाले दूध पैकेट और डेयरी उत्पादों को 12 फीसदी स्लैब से निकाल कर 05 फीसदी स्लैब के दायरे में ला दिया है.
                  तैयार या संरक्षित मछली पर कर की दर में भी कमी देखी गई है ताकि मत्स्य पालन को बढ़ावा मिल सकें. इसके अलावा मधुमक्खी पालकों, आदिवासी समुदायों और ग्रामीण स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा देने के लिए प्राकृतिक शहद आदि में भी 05 फीसदी जीएसटी लागू किया जाएगा.
                  माल वाहक वाहनों को बढ़ावा मिले और  कृषि उत्पादों का परिवहन आसान हो  इसलिए
सौर ऊर्जा आधारित उपकरणों पर जीएसटी 12 फीसदी से घटकर 5 फीसदी हो जाएगा. इसके अलावा कामर्शियल माल वाहन (ट्रक, डिलीवरी वैन आदि) को 28 फीसदी टैक्स के दायरे को कम कर 18 फीसदी स्लैब में लाया गया है. इन वाहनों की बीमा दर को भी 12 फीसदी स्लैब से निकाल कर 05 फीसदी स्लैब में लाया गया है.

GST क्या है?

GST (गुड्स एंड सेवा टैक्स) भारत में एक ऐसी एकीकृत टैक्स व्यवस्था है जिसमें कई अप्रत्यक्ष टैक्स शामिल होते हैं. यह घरेलू उपभोग के लिए बेची जाने वाली अधिकांश वस्तुओं और सेवाओं पर लगाया जाता है । जिससे बिज़नेस और उपभोक्ताओं के लिए आसान टैक्स संरचना सुनिश्चित होती है. जीएसटी का भुगतान उपभोक्ताओं द्वारा किया जाता है, लेकिन इसे वस्तुओं और सेवाओं को बेचने वाले व्यवसायों द्वारा सरकार को भेज दिया जाता है।

किसानों का क्या है कहना

इस बारे में किसानों की मिली- जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली है. जहाँ कई किसान खेती और सम्बद्ध

क्षेत्रो में जीएसटी कम होने से खुश है, वही कई किसान नेताओं का कहना है कि, किसानों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरणों पर अभी भी 5% जीएसटी है. हमने सरकार से कृषि को 0% जीएसटी के दायरे में लाने की माँग की थी, जिससे और राहत मिलेगी. साथ ही केम‍िकल पेस्ट‍िसाइड पर क‍िसानों को 18 फीसदी जीएसटी ही देना होगा स‍िर्फ बायो पेस्ट‍िसाइड पर जीएसटी घटाया गया है. एक तरफ़ सरकार सब्सिडी की बात करती हैं और दूसरी तरफ़ टैक्स की. उपकरण और खाने-पीने की चीज़ें पूरी तरह जीएसटी मुक्त होनी चाहिए.                                                                           

                          केंद्र सरकार द्वारा GST दरों में किए गए बदलावों से न सिर्फ रोजमर्रा की उपयोगी वस्तुएं सस्ती होंगी, बल्कि किसानों को भी बड़ी राहत मिलेगी. खेती पर लागत कम होने से मुनाफा अधिक होने की सम्भावना बनेगी।

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अपनी कलम और प्रखर वाणी के दम पर पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी अनूठी पहचान बनाने वाली श्रुति प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, ब्रॉडकास्ट और डिजिटल मीडिया में कार्य करने का 11 वर्षों का अनुभव रखती है. इन्होंने होलकर विज्ञान महाविद्यालय से बायोटेक्नोलॉजी में विशेषज्ञता के साथ बी.एस.सी.की है. कुशल मीडिया और कम्युनिकेशन प्रोफेशनल श्रुति ने पत्रकारिता और जनसंचार में एम.ए., पत्रकारिता और जनसंचार अध्ययनशाला देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर, मध्यप्रदेश से किया है. रिपोर्टर के रूप में अपने करियर की शुरुआत करने वाली श्रुति ने अर्टिकल राइटर, कंटेंट राइटर, एंकर, स्क्रिप्ट राइटर, रेडियो जॉकी, ब्यूरो चीफ, समाचार सम्पादक, संपादक, कंटेंट मैनेजर, नेशनल हेड - इवेंट्स और जनसम्पर्क पदों पर रहते हुए अपनी कार्यकुशलता का परिचय दिया है. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण आदि समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में कार्य करने के साथ, आकाशवाणी (आल इंडिया रेडियो), कृषि जागरण, ग्रीन टी. वी., आर्यन टी. वी. नेशनल (साधना मीडिया प्राइवेट लिमिटेड, नोएडा )में भी कार्य किया है. लेखक और कवि होने के साथ ही श्रुति एंकर और व्यक्तित्व विकास प्रशिक्षक भी है. वर्तमान में एग्री संपर्क (डिजिटल संपर्क, नोएडा) में मुख्य संपादक और नेशनल हेड - इवेंट्स और जनसम्पर्क के पद पर कार्यरत हैं

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