सरकारी योजना

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प्रधान मंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) यूआरएल

प्रधान मंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) भारत की सबसे प्रसिद्ध सरकारी कृषि योजनाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य भारत के छोटे और सीमांत किसानों को पर्याप्त आय सहायता प्रदान करना है। इसे वर्ष 2019 में शुरू किया गया था और इसका उद्देश्य भारतीय किसानों को आवश्यक धनराशि प्रदान करना है ताकि वे अपनी बुनियादी खेती से जुड़ी ज़रूरतों का ध्यान रख सकें।

लाभ

  • इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों के खातों में सालाना ₹6000 की राशि स्थानांतरित करना है।

  • यह राशि तीन बराबर किस्तों में ₹2000-₹2000 की प्रत्येक चार महीने में सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाती है।

पात्रता

  • सभी किसान जिनके पास राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के भूमि अभिलेखों के अनुसार अधिकतम दो हेक्टेयर तक भूमि है, वे पात्र हैं।

लक्षित समूह

  • इस योजना के प्राथमिक लाभार्थी छोटे और सीमांत भूमि धारक किसान परिवार हैं।

प्रधान मंत्री किसान मानधन योजना (PM-KMY) यूआरएल

प्रधान मंत्री किसान मानधन योजना (PM-KMY) भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक पेंशन योजना है। यह योजना श्रम और रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत संचालित होती है।

लाभ

  • इस योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसान जब खेतों में काम करने में असमर्थ हो जाएँ, तब भी उन्हें नियमित आय का स्रोत प्राप्त हो।

  • पात्र किसानों को 60 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद ₹3000 प्रति माह पेंशन दी जाती है।

  • यदि पात्र किसान की मृत्यु हो जाती है, तो उसकी पत्नी/पति को भी पेंशन का लाभ प्राप्त होता है।

पात्रता

  • यह योजना केवल छोटे और सीमांत किसानों के लिए है जिनके पास अधिकतम 2 हेक्टेयर तक की भूमि है।

  • ऐसे किसान जो किसी अन्य पेंशन योजना में पहले से शामिल नहीं हैं, वही इस योजना के लिए पात्र हैं।

लक्षित समूह

  • यह योजना विशेष रूप से 18 से 40 वर्ष की आयु वाले किसानों के लिए है।

प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) यूआरएल

भारत में फसलों की बर्बादी एक बड़ी समस्या है, जो कई बार किसानों की आत्महत्या का कारण भी बनती है। इस गंभीर मुद्दे को संबोधित करने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2016 में प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) की शुरुआत की।

यह एक फसल बीमा संबंधी कृषि योजना है, जिसका उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं, कीटों और बीमारियों के कारण फसल क्षति या हानि की स्थिति में किसानों को वित्तीय सहायता और जोखिम से राहत प्रदान करना है। इस योजना का लक्ष्य कृषि क्षेत्र की समग्र स्थिरता को सुनिश्चित करना और किसानों को फसल हानि के कारण होने वाली वित्तीय कठिनाइयों से बचाना है।

लाभ

  • इस योजना के तहत भारत के किसानों के लिए सभी खाद्य फसलें, तिलहन और वार्षिक वाणिज्यिक/बागवानी फसलें कवर की जाती हैं।
  • बीज बुवाई से लेकर कटाई के बाद तक की प्राकृतिक आपदाएँ जैसे सूखा, बाढ़, चक्रवात, कीट, रोग आदि शामिल किए गए हैं।
  • फसल बीमा प्रीमियम का खर्च किसान और सरकार मिलकर वहन करते हैं। किसानों के लिए प्रीमियम को सब्सिडी के माध्यम से किफायती और सुलभ बनाया गया है।

पात्रता

  • वे सभी किसान जिन्होंने ऋण देने वाली वित्तीय संस्थाओं से मौसमी कृषि कार्य (SAO) के लिए ऋण प्राप्त किया है, इस योजना के अंतर्गत आवेदन कर सकते हैं।

लक्षित समूह

  • छोटे और सीमांत किसान इस योजना के प्रमुख लाभार्थी हैं।
संशोधित ब्याज सब्सिडी योजना (Modified Interest Subvention Scheme – MISS) यूआरएल

संशोधित ब्याज सब्सिडी योजना (MISS) वर्ष 2006-07 में शुरू की गई थी। यह भारत सरकार की एक प्रमुख योजना है, जिसका उद्देश्य किसानों को कम ब्याज दर पर अल्पकालिक ऋण (Short-Term Loan) उपलब्ध कराना है। इस योजना का उद्देश्य भारत में किसानों द्वारा की जाने वाली आत्महत्याओं को रोकना है, जो अक्सर ऋण की कमी या ऊँची ब्याज दरों के कारण होती हैं।

लाभ

  • किसान ₹3 लाख तक का ऋण केवल 7% की रियायती ब्याज दर पर प्राप्त कर सकते हैं।

  • यदि किसान समय पर ऋण चुकाते हैं, तो उन्हें 3% अतिरिक्त ब्याज सब्सिडी दी जाती है, जिससे प्रभावी ब्याज दर केवल 4% हो जाती है।

  • यह योजना केवल खेती ही नहीं, बल्कि पशुपालन, डेयरी, कुक्कुट पालन और मत्स्य पालन जैसे सहायक क्षेत्रों के लिए भी लागू है।

पात्रता

  • हर छोटा और सीमांत किसान, जो खेती या सहायक सेवाओं से जुड़ा है, इस योजना का लाभ ले सकता है।

लक्षित समूह

  • भारत के सभी छोटे और सीमांत किसान इस योजना के प्राथमिक लाभार्थी हैं।

कृषि अवसंरचना निधि (Agriculture Infrastructure Fund – AIF) यूआरएल

कृषि अवसंरचना निधि (AIF) केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है, जिसे जुलाई 2020 में केंद्रीय कैबिनेट द्वारा मंजूरी दी गई थी। इस योजना का उद्देश्य किसानों को फसल कटाई के बाद प्रबंधन और कृषि से जुड़ी अधोसंरचना के निर्माण हेतु मध्यम से दीर्घकालिक ऋण प्रदान करना है।

लाभ

  • किसान ₹2 करोड़ तक का ऋण 7 वर्षों के लिए प्राप्त कर सकते हैं।

  • सभी ऋणों पर 3% ब्याज में छूट (Interest Subvention) का लाभ मिलता है।

  • लाभार्थियों को ब्याज दर (ROI) अधिकतम 9% तक सीमित की जाती है।

पात्रता

  • वे पंजीकृत किसान जो मशरूम की खेती, वर्टिकल फार्मिंग, हाइड्रोपोनिक या पॉलीहाउस खेती में संलग्न हैं।

लक्षित लाभार्थी

  • किसान

  • संयुक्त दायित्व समूह (Joint Liability Groups)

  • एग्री-उद्यमी (Agri-Entrepreneurs)

  • स्वयं सहायता समूह (Self Help Groups)

  • और कृषि से जुड़े अन्य व्यक्ति या संगठन

10,000 नए किसान उत्पादक संगठन (FPOs) का गठन एवं संवर्धन योजना यूआरएल

10,000 एफपीओ के गठन और प्रचार-प्रसार की यह केंद्रीय क्षेत्र योजना भारत सरकार द्वारा शुरू की गई है, जिसे राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) के माध्यम से संचालित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को बढ़ावा देना और उन्हें सहायता प्रदान करना है। इस योजना को 9 मान्यता प्राप्त कार्यान्वयन एजेंसियों की मदद से लागू किया जा रहा है।

लाभ:

  • इच्छुक किसान और संगठन वित्तीय सहायता, इक्विटी ग्रांट और क्रेडिट सुविधाएं प्राप्त कर सकते हैं।

  • प्रत्येक FPO को ₹18 लाख तक का क्रेडिट 3 वर्षों के लिए प्रदान किया जाता है।

  • प्रत्येक किसान सदस्य को ₹2,000 की इक्विटी ग्रांट (अधिकतम ₹15 लाख प्रति FPO तक)।

  • ₹2 करोड़ तक की क्रेडिट गारंटी सुविधा भी उपलब्ध है।

पात्रता:

  • वे किसान उत्पादक संगठन (FPOs) जो पंजीकृत हैं, इस योजना का लाभ ले सकते हैं।

लक्षित लाभार्थी:

  • लघु और सीमांत किसान

  • किसान समूह

  • सहकारी समितियाँ

  • और कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों से जुड़े अन्य संगठन

राष्ट्रीय मधुपालन और शहद मिशन (NBHM) यूआरएल

राष्ट्रीय मधुपालन और शहद मिशन (NBHM) केंद्र सरकार की एक योजना है, जिसे कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य भारत में व्यावसायिक मधुपालन को बढ़ावा देना और “मीठी क्रांति” को साकार करना है। इस योजना के तहत किसानों को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, और विपणन से जुड़ी सुविधाएं प्रदान की जाती हैं।

लाभ:

  • आर्थिक सहायता: लाभार्थियों को आधुनिक मधुपालन तकनीकों की जानकारी, सब्सिडी और मार्केट से जुड़ाव के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है।

  • 100% वित्तीय सहायता सार्वजनिक क्षेत्र के लिए और 50% सब्सिडी निजी क्षेत्र को, प्रति प्रोजेक्ट अधिकतम ₹3 लाख तक।

  • सहायता तीन किश्तों में प्रदान की जाती है: 50%, 25%, और 25%।

  • बी ब्रीडर (Bee Breeders) को ₹5 लाख प्रति प्रोजेक्ट तक की सहायता।

  • IBDC (Integrated Beekeeping Development Centre) के लिए ₹750 लाख तक की राशि।

  • टेस्टिंग लैब्स के लिए:

    • क्षेत्रीय स्तर पर: ₹800 लाख तक

    • ज़िला स्तर पर: ₹100 लाख तक

  • महिला समूहों को प्रति समूह ₹20,000 की सहायता।

पात्रता :

  • पात्रता विभिन्न श्रेणियों के अनुसार भिन्न होती है।

  • महिला समूहों के लिए: समूह में SC/ST वर्ग की महिलाएं होनी चाहिए।

  • बी ब्रीडर के लिए: प्रति वर्ष न्यूनतम 2000 उच्च गुणवत्ता वाली मधुमक्खी कॉलोनियों को संभालने की क्षमता होनी चाहिए।

लक्षित लाभार्थी :

  • किसान, एफपीओ (FPOs), स्वयं सहायता समूह (SHGs), सहकारी समितियां, उद्यमी जो वैज्ञानिक मधुपालन और संबंधित गतिविधियों में लगे हैं।

बाजार हस्तक्षेप योजना (MIS) और मूल्य समर्थन योजना (PSS) यूआरएल

बाजार हस्तक्षेप योजना (Market Intervention Scheme – MIS) और मूल्य समर्थन योजना (Price Support Scheme – PSS) केंद्र सरकार की दो महत्वपूर्ण योजनाएँ हैं, जिनका उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना है। यह योजनाएँ मुख्यतः जल्दी खराब होने वाली और बागवानी फसलों के लिए लागू की जाती हैं।

लाभ:

  • किसानों को अधिकतम मूल्य समर्थन प्रदान करना।

  • किसानों को आय सुरक्षा (Income Security) मिलती है।

  • यह योजना सेब, लहसुन, माल्टा, काली मिर्च, अदरक, लाल मिर्च, धनिया बीज और लौंग जैसी फसलों को कवर करती है।

पात्रता:

  • MIS और PSS के तहत पात्रता संबंधित मार्गदर्शिकाओं के अनुसार भिन्न हो सकती है।

  • योजना तभी लागू होती है जब किसी फसल की कीमत में न्यूनतम 10% की वृद्धि या कमी होती है।

लक्ष्य समूह:

  • सभी किसान, उत्पादक और बागवानी तथा जल्दी खराब होने वाली फसलों के उत्पादक इस योजना के लक्षित लाभार्थी हैं।

नमो ड्रोन दीदी योजना यूआरएल

नमो ड्रोन दीदी योजना, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण भारत की महिलाओं को सशक्त बनाना है। इस योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि से जुड़ी महिलाओं को ड्रोन उपलब्ध कराती है, जिससे वे खाद छिड़काव, बीज बोना और फसलों की निगरानी जैसे कृषि कार्यों में सहयोग कर सकें।

लाभ:

  • महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को ड्रोन की कुल लागत पर 80% तक की सब्सिडी, अधिकतम ₹8 लाख तक।

  • 3% की सस्ती ब्याज दर पर एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) से ऋण।

  • ड्रोन चलाने और संचालन के लिए प्रशिक्षण

  • ड्रोन की मदद से महिला SHGs सालाना ₹1 लाख तक की कमाई कर सकती हैं।

पात्रता:

  • सक्रिय महिला स्वयं सहायता समूह (Self Help Group) की सदस्य इस योजना के लिए पात्र हैं।

लक्ष्य समूह:

  • ग्रामीण क्षेत्रों की महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्याएं।