Fish Farming : खेती के साथ मछली पालन है फायदे का सौदा

Fish Farming खेती के साथ मछली पालन है फायदे का सौदा

खेती-किसानी आज के दौर की आवश्यकता है, क्योंकि देश की आर्थिक रीढ़ कृषि पर आधारित है। पर सिर्फ देश नहीं, किसानों की आर्थिक उन्नति भी उतनी ही आवश्यक है। खेती के साथ यदि कोई ऐसा सहायक व्यवसाय जोड़ा जाए, जिससे लागत कम और मुनाफा अधिक हो, तो किसान की आमदनी निश्चित रूप से बढ़ाई जा सकती है। मछली पालन ऐसा ही एक लाभकारी विकल्प है, जिसे किसान खेत के साथ जोड़कर दुगनी आमदनी हासिल कर सकते हैं। खेती के साथ मछली पालन से किसान कैसे अपनी आय दुगुनी कर सकते है ये गणित समझिए इस लेख में- 

खेती के साथ मछली पालन के लाभ

  • किसान, खेतों से बहने वाले पानी को तालाब में जमा कर सकते है। इससे जल का संरक्षण भी होगा और मछली पालन भी करना आसान होगा। 
  • मछलियों के तालाब से निकला पानी जैविक खाद युक्त होता है, जिससे फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन बढ़ता है।
  • किसान एक ही ज़मीन से दोहरा उत्पादन कर सकते हैं. खेती और मछली पालन एक साथ करने से किसान एक ही ज़मीन से दो स्रोतों से कमाई कर सकते है। इसके लिए किसान, सरकार की योजनाओं से लोन व सब्सिडी का लाभ भी ले सकते हैं.

लागत और लाभ (Fish Farming Cost & Profit)

किसान खेती के साथ मछली पालन करने का सोचे तो इसके लिए लगने वाली लागत के बारे में जानना ज़रूरी है. यदि 1 एकड़ में मछली पालन करने के लिए अनुमानित राशि की बात करें तो तालाब निर्माण में ₹60,000 – ₹1,00,000, मछलियों के बीज के लिए ₹10,000 – ₹15,000, चारा और दवाइयों के लिए ₹20,000 – ₹30,000 और अन्य खर्च ₹10,000 आते हैं.
                            इस प्रकार कुल लागत ₹1,00,000 – ₹1,50,000 लगाकर मछली उत्पादन करके,मछलियों के वजन के हिसाब से आकलन करने और बेचने पर 1000–1500 किग्रा के लिए ₹2,00,000 – ₹3,00,000 मूल्य प्राप्त होता है. इस हिसाब से किसान भाई खेती के साथ मछली पालन करके ₹1,00,000 या अधिक लाभ कमा सकते हैं. यह लाभ उत्पादन क्षेत्र के अनुसार थोड़ा कम या ज्यादा हो सकता है।
                                             तो किसान भाइयों अगर आप उचित योजना, तालाब प्रबंधन और सरकारी सहायता का लाभ उठाते हैं, तो आप एक ही ज़मीन से दुगनी आमदनी प्राप्त कर सकते हैं।खेती के साथ मछली पालन करके कम लागत में अधिक मुनाफा कमाइए और जीवन को खुशहाल बनाइए।

About श्रुति जोशी 35 Articles
अपनी कलम और प्रखर वाणी के दम पर पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी अनूठी पहचान बनाने वाली श्रुति प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, ब्रॉडकास्ट और डिजिटल मीडिया में कार्य करने का 11 वर्षों का अनुभव रखती है. इन्होंने होलकर विज्ञान महाविद्यालय से बायोटेक्नोलॉजी में विशेषज्ञता के साथ बी.एस.सी.की है. कुशल मीडिया और कम्युनिकेशन प्रोफेशनल श्रुति ने पत्रकारिता और जनसंचार में एम.ए., पत्रकारिता और जनसंचार अध्ययनशाला देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर, मध्यप्रदेश से किया है. रिपोर्टर के रूप में अपने करियर की शुरुआत करने वाली श्रुति ने अर्टिकल राइटर, कंटेंट राइटर, एंकर, स्क्रिप्ट राइटर, रेडियो जॉकी, ब्यूरो चीफ, समाचार सम्पादक, संपादक, कंटेंट मैनेजर, नेशनल हेड - इवेंट्स और जनसम्पर्क पदों पर रहते हुए अपनी कार्यकुशलता का परिचय दिया है. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण आदि समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में कार्य करने के साथ, आकाशवाणी (आल इंडिया रेडियो), कृषि जागरण, ग्रीन टी. वी., आर्यन टी. वी. नेशनल (साधना मीडिया प्राइवेट लिमिटेड, नोएडा )में भी कार्य किया है. लेखक और कवि होने के साथ ही श्रुति एंकर और व्यक्तित्व विकास प्रशिक्षक भी है. वर्तमान में एग्री संपर्क (डिजिटल संपर्क, नोएडा) में मुख्य संपादक और नेशनल हेड - इवेंट्स और जनसम्पर्क के पद पर कार्यरत हैं

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