Chia seeds Farming : औषधीय फसल की खेती करेगी मालामाल, जानिए खेती के लिए क्या हैं ज़रूरी

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चिया बीज, एक औषधीय और नकदी फसल है। भारत चिया बीज का एक प्रमुख और उभरता हुआ निर्यातक बन रहा है, जहाँ अंतरराष्ट्रीय खरीदार भारतीय उत्पादकों की ओर रुख कर रहे हैं। किसान भाइयों अगर आप अपनी खेती में किसी नई, लाभकारी और कम लागत वाली फसल को शामिल करना चाहते हैं, तो चिया सीड्स की खेती (Chia Seeds Farming) आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प बन सकती है।
               यह फसल न केवल पौष्टिक और औषधीय गुणों से भरपूर है, बल्कि इसकी बाजार में भारी मांग भी है। खास बात यह है कि चिया की खेती में कम पानी, कम खाद और कम मेहनत की जरूरत होती है, और सही तकनीक से खेती कर के आप प्रति एकड़ 5-6 लाख रुपये तक मुनाफा कमा सकते हैं। इस लेख में पढ़े की नाप चिया सीड्स की खेती कैसे कर सकते हैं 

चिया सीड्स क्या है और क्यों है सुपरफूड?

चिया एक प्रकार की औषधीय फसल है, जिसके बीजों में अत्यधिक मात्रा में फाइबर, प्रोटीन, ओमेगा-3 फैटी एसिड, एंटीऑक्सीडेंट और कई प्रकार के पोषक तत्व होते हैं। ये बीज ग्लूटेन फ्री होते हैं और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करने, वजन घटाने और पाचन सुधारने में उपयोगी माने जाते हैं। यही कारण है कि देश और विदेशों में चिया की भारी मांग है। भारत चिया सीड्स का एक प्रमुख निर्यातक है। कोविड-19 के बाद से, विदेशी बाज़ारों   

चिया की खेती से जुड़े प्रमुख लाभ:

इसकी खेती करने पर कम लागत में अधिक मुनाफा होता है और यह फसल भी 110-115 दिनों में तैयार हो जाती है. इसमें कम सिंचाई और खाद की जरूरत होती है. आप इसकी खेती जैविक तरीके से भी कर सकते हैं।  विशेष बात यह है कि, बाजार में इसकी अच्छी कीमत ₹900-₹1,000 प्रति किलो तक प्राप्त होती है.

खेती के लिए क्या है आवश्यक –

  1. जलवायु और मिट्टी
    चिया की खेती के लिए हल्की से मध्यम भुरभुरी मिट्टी  जिसकी जल निकासी अच्छी हो, उपयुक्त मानी जाती है।
    मिट्टी का pH मान 6 से 8.5 के बीच होना चाहिए। 15-20 डिग्री सेल्सियस तापमान और ठंडा-शुष्क मौसम इसकी उपज के लिए बेहतर है।
  2. बुवाई का समय
    अक्टूबर-नवंबर माह में इसकी बुवाई सबसे उपयुक्त होती है। खरीफ फसलों के बाद इसे सह-फसली के रूप में भी उगाया जा सकता है।
  3. बीज मात्रा और दूरी
    इसकी खेती के लिए एक एकड़ के लिए 1 से 1.5 किलो बीज पर्याप्त होता है। बीज को लाइन से लाइन 30 सेमी दूरी पर और 1.5 सेमी गहराई में बोना चाहिए।
  4. खाद और सिंचाई
    अच्छी उपज के लिए 10-12 टन गोबर की खाद, और संतुलित मात्रा में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस व पोटाश देना जरूरी है। सिंचाई बहुत कम चाहिए होती है, केवल बुवाई के बाद हल्की नमी रखें।
  5. देखभाल
    इसकी खेती के समय 2 बार निराई-गुड़ाई करना चाहिए ताकि खरपतवार न पनपे। चिया सीड्स की फसल 110-115 दिन में तैयार होती है।
  6. उपज और मुनाफा
    एक एकड़ में चिया की खेती से औसतन 5 से 6 क्विंटल बीज की पैदावार हो सकती है। बाजार में चिया बीज की कीमत लगभग ₹1,000 प्रति किलो तक है। इस हिसाब से आप एक एकड़ में ₹5-6 लाख रुपये तक का मुनाफा कमा सकते हैं। इसमें लागत बहुत कम होती है, जिससे शुद्ध लाभ ज्यादा रहता है।

नवीनतम रुझान और सरकारी समर्थन:

  • भारत चिया बीज का एक प्रमुख और उभरता हुआ निर्यातक बन रहा है, जहाँ अंतरराष्ट्रीय खरीदार भारतीय उत्पादकों की ओर रुख कर रहे हैं। 
  • इसकी खेती पर्यावरण के अनुकूल है और अधिक मुनाफा मिलने के कारण  कुछ किसान, जैसे कि जबलपुर के कैलाश यादव, जैविक रूप से चिया सीड्स की खेती कर रहे हैं.
  • मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सहित देश के कई राज्यों में किसान अपनी आय बढ़ाने के लिए इस लाभकारी फसल की खेती कर रहे हैं.

सरकार भी चिया सीड्स की खेती को बढ़ावा दे रही है और ICAR आदि संस्थान किसानों की मदद कर रहें हैं.

तो किसान भाइयों, आज का समय स्मार्ट और लाभकारी खेती का है। चिया जैसी सुपरफूड फसलों की खेती करके आप कम संसाधनों में अधिक आय अर्जित कर सकते हैं। बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे यह फसल भविष्य के लिए भी टिकाऊ और मुनाफेदार विकल्प बन रही है।तो आप अपने खेत में चिया की खेती शुरू करें और खेती को बनाएं फायदे का सौदा!

About श्रुति जोशी 35 Articles
अपनी कलम और प्रखर वाणी के दम पर पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी अनूठी पहचान बनाने वाली श्रुति प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, ब्रॉडकास्ट और डिजिटल मीडिया में कार्य करने का 11 वर्षों का अनुभव रखती है. इन्होंने होलकर विज्ञान महाविद्यालय से बायोटेक्नोलॉजी में विशेषज्ञता के साथ बी.एस.सी.की है. कुशल मीडिया और कम्युनिकेशन प्रोफेशनल श्रुति ने पत्रकारिता और जनसंचार में एम.ए., पत्रकारिता और जनसंचार अध्ययनशाला देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर, मध्यप्रदेश से किया है. रिपोर्टर के रूप में अपने करियर की शुरुआत करने वाली श्रुति ने अर्टिकल राइटर, कंटेंट राइटर, एंकर, स्क्रिप्ट राइटर, रेडियो जॉकी, ब्यूरो चीफ, समाचार सम्पादक, संपादक, कंटेंट मैनेजर, नेशनल हेड - इवेंट्स और जनसम्पर्क पदों पर रहते हुए अपनी कार्यकुशलता का परिचय दिया है. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण आदि समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में कार्य करने के साथ, आकाशवाणी (आल इंडिया रेडियो), कृषि जागरण, ग्रीन टी. वी., आर्यन टी. वी. नेशनल (साधना मीडिया प्राइवेट लिमिटेड, नोएडा )में भी कार्य किया है. लेखक और कवि होने के साथ ही श्रुति एंकर और व्यक्तित्व विकास प्रशिक्षक भी है. वर्तमान में एग्री संपर्क (डिजिटल संपर्क, नोएडा) में मुख्य संपादक और नेशनल हेड - इवेंट्स और जनसम्पर्क के पद पर कार्यरत हैं

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