प्याज के बिना तो ना सब्जियों में कोई स्वाद होता है ना किसी व्यंजन में. प्याज रोज की भोजन की थाली का अनिवार्य हिस्सा है. और प्याज को सुरक्षित रखना और सड़ने से बचाना कई बार चुनौती बन जाती है. पर बात भारत की करें तो यह देश जितना अपनी संस्कृति , एकता और तरक्की के लिए प्रसिद्ध है उतना ही ज्यादा अपने जुगाड़ों के लिए भी जाना जाता है। ऐसा ही एक देशी जुगाड़ निकाला है हरियाणा के भिवानी के प्रगतिशील किसान सुमेर सिंह ने और इसके साथ ही जैविक तरीके से खेती करके लाखों रूपए कमा रहे हैं. पढिए, उनके जुगाड़ और सफलता की कहानी इस लेख में –
शुरुआत का सफर
यह कहानी एक ऐसे किसान सुमेर सिंह की है जिसने मिट्टी से रिश्ता बनाए रखते हुए, प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर खेती को फिर से सम्मान और सफलता का रास्ता बना दिया है। सुमेर सिंह हरियाणा में भिवानी के ढाणी माहू के रहने वाले हैं। 10वीं तक की पढ़ाई करने वाले सुमेर ने वर्ष 1999 में खेती की शुरुआत की. उन्होंने पहले पारंपरिक तरीकों से मुख्य रूप से कपास की रासायनिक खेती की। समय के साथ उन्हें यह महसूस हुआ कि, इन रसायनों से मिट्टी की गुणवत्ता, फसलों का स्वाद और परिवार का स्वास्थ्य सभी पर बुरा असर पड़ रहा है। इसी सोच ने उन्हें जैविक खेती की ओर मोड़ दिया।
जैविक खेती को बनाया फायदे का सौदा
किसान सुमेर सिंह के इलाके की मिट्टी बहुत अच्छी नहीं है और पानी की भी समस्या रहती है। लेकिन फिर भी उन्होंने जैविक खेती की शुरुआत की. पिछले छह सालों से जैविक तरीकों से खेती करके उन्होंने अच्छी कमाई की और अब दूसरे किसानों को भी प्रेरित कर रहे हैं। हर बार अपने खेतों में नवीन प्रयोग करने वाले सुमेर सिंह खुद को ‘बावला जाट’ कहते हैं. वे अब अपनी 14 एकड़ जमीन में जैविक तरीके से गेहूं, चना, दलहन और सरसों की खेती कर रहे हैं। उन्होंने जैविक मल्चिंग से अपनी एक एकड़ जमीन पर प्याज की खेती की है।
जैविक मल्चिंग से प्याज़ की खेती (Organic Mulching)
जैविक मल्चिंग में मिट्टी की सतह पर पत्तियों, घास, लकड़ी के चिप्स, भूसे और खाद जैसी प्राकृतिक सामग्री की परत बिछाई जाती है। यह मिट्टी की नमी बनाए रखने, खरपतवारों को नियंत्रित करने, मिट्टी को पोषक तत्व प्रदान करने और मिट्टी को ठंडा रखने में मदद करती है। कृषक सुमेर सिंह ने प्याज़ की खेती के लिए जैविक मल्चिंग का प्रयोग किया। उन्होंने पराली को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर मल्चिंग की, जिससे मिट्टी की नमी बनी रही और सिंचाई की ज़रूरत भी कम पड़ी और इस कारण, उन्होंने फसल के लिए जो गौ अमृतम बैक्टीरिया कल्चर डाला था, उसने भी अच्छा काम किया।
उनके अनुसार एक एकड़ प्याज़ की फसल के लिए पांच एकड़ की पराली पर्याप्त होती है। इससे पराली जलाने की समस्या का समाधान भी होता है।
प्याज़ संरक्षण का देसी जुगाड़
परंपरागत तरीकों की बात करें तो उसमे प्याज़ को बोरी में भरकर रखा जाता है, जिससे नीचे की प्याज़ दबकर सड़ने लगती है। लेकिन सुमेर सिंह ने अपनी ज़रूरत से ऐसा देसी जुगाड़ निकाला कि प्याज़ अब महीनों तक खराब नहीं होती।
प्याज को स्टोर करने की इस अनोखी देसी तकनीक में उन्होंने प्याज की कटाई के बाद, कुछ प्याजों को साथ में बाँधा और फिर खेत में बनाए शेड में रस्सी लगाकर इन्हें लटका दिया। उन्होंने प्याज को केले की तरह रस्सियों से बांधकर लटकाने का जो तरीका अपनाया उससे प्याज़ को भरपूर हवा मिलती है और प्याज 3-4 महीनों तक खराब नहीं होता। साथ ही अगर कोई प्याज़ खराब हो भी जाए तो वह आसानी से दिख जाता है और उसे अलग किया जा सकता है। फिर जैसे-जैसे प्याज सूखने लगे, तो इसका बाहरी छिलका हटाक्कर फिर लटका दें। इस तरह प्याज को साल भर भी रख सकते हैं।यह तकनीक सस्ती भी है और नुकसान से भी बचाती है।
प्याज की मार्केटिंग
प्याज की इस देसी स्टोरेज तकनीक के कारण उन्हें बाजार में बेहतर दाम मिलते हैं, क्योंकि उनकी प्याज का स्वाद और ताजगी दोनों अधिक समय तक बनी रहती हैं। उनके ग्राहक भी अब उन्हें *खास तौर पर जैविक प्याज के लिए खोजते हैं। बात अगर मार्केटिंग की करें, तो जैविक मल्चिंग तकनीक से उन्होंने एक एकड़ में लगभग 80 क्विंटल प्याज़ का उत्पादन किया, जिसमें 55,000 रुपये लागत लगी.
उन्होंने 25 क्विंटल प्याज़ 25–35 रुपये प्रति किलो के हिसाब से प्याज बेचे. प्याज की बिक्री से, अपनी लागत निकालने के बाद वह अच्छी कमाई कर रहे हैं।
जैविक खेती करने के लिए करते है प्रेरित
सफल किसान सुमेर सिंह ने खेती में रसायन का प्रयोग नहीं किया तो अब न खेत बीमार हैं, न परिवार। इसलिए उनका मानना है कि जैविक खेती सिर्फ एक तरीका नहीं, एक जिम्मेदारी है, जो हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए भी ज़मीन को उपजाऊ और जीवन को स्वस्थ बनाए रखती है। सुमेर सिंह आसपास के किसानों को भी जैविक खेती की ट्रेनिंग देते हैं। देश के युवाओं को खेती से जुड़ने के लिए प्रेरित करते हैं.
प्रगतिशील किसान सुमेर सिंह ने अपने जीवन कर्म से यह साबित किया है कि अगर सही सोच और सही तकनीक अपनाई जाए तो खेती घाटे का सौदा नहीं, बल्कि सबसे बड़ा मुनाफे का व्यवसाय है।

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