Poly House Farming हाइटेक खेती से किसान “निवेश” बनें धनवान 

किसानों की किस्मत तब ही बदल सकती है, ज़ब वो खुद बदलना चाहें और खेती में आधुनिक तकनीकों के प्रयोग और नवाचारों पर ज़ोर दें. ऐसे ही एक किसान की सफलता की कहानी पढ़े इस लेख में जिसने अपनी किस्मत को बदलने का जोखिम लिया, पॉली हाउस में उगाई शिमला मिर्च-खीरा,और अब 1.5 लाख रूपए प्रति बीघा कमा रहे हैं.आप भी बदलना चाहते है अपनी किस्मत तों इस लेख को पूरा पढ़िए –

क्या किया है निवेश जाट ने –

मध्यप्रदेश के गुना जिले के विकासखंड पिछोर के ग्राम कुमरौआ निवासी निवेश जाट ने परंपरागत खेती को छोड़कर हाइटेक फार्मिंग अपनाई है। इससे उन्होंने न सिर्फ अपनी आमदनी में बढ़ोतरी की है, बल्कि वर्ष में 700 से 800 लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं। 

खेती में हुआ लाखों का मुनाफ़ा 

निवेश लगभग 15-वर्षों से खेती कर रहे हैं, लेकिन बीते 3-4 वर्षों से पॉली हाउस के माध्यम से शिमला मिर्च, खीरे और टमाटर की खेती शुरू की.।पहले उन्हें परंपरागत फसलों से प्रति बीघा लगभग ₹20,000 का लाभ मिलता था। लेकिन अब पॉली हाउस तकनीक से खेती कर वे प्रति बीघा ₹1.5 लाख तक कमा रहे हैं.

दिल्ली में मिलें, फसलों के दाम 

उन्होंने हाल ही खीरे की फसल को दिल्ली के बाजारों में अच्छे दामों पर बेचा है। पोली हाउस तकनीक का प्रयोग करके कृषक निवेश ने आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं.

कई लोगों को दें रहें है रोजगार 

निवेश जाट  आसपास के गरीब और बेरोजगार लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं। वे एक वर्ष में करीब 700 से 800 लोगों को 11 महीने तक रोजगार उपलब्ध करवाते हैं।

शासन की योजनाओं का लिया लाभ 

निवेश जाट ने  मध्यप्रदेश शासन द्वारा पॉली हाउस निर्माण के लिए दी जाने वाली 50% सब्सिडी का लाभ लिया.,पॉली हाउस का निर्माण किया और शिमला मिर्च और खीरे का उत्पादन किया.

आप भी किसान निवेश की सफलता से ले सकते हैं प्रेरणा और आधुनिक खेती के तरीकों को अपनाकर आर्थिक उन्नति कर सकते हैं. और पा सकते हैं लाखों का मुनाफ़ा.

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अपनी कलम और प्रखर वाणी के दम पर पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी अनूठी पहचान बनाने वाली श्रुति प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, ब्रॉडकास्ट और डिजिटल मीडिया में कार्य करने का 11 वर्षों का अनुभव रखती है. इन्होंने होलकर विज्ञान महाविद्यालय से बायोटेक्नोलॉजी में विशेषज्ञता के साथ बी.एस.सी.की है. कुशल मीडिया और कम्युनिकेशन प्रोफेशनल श्रुति ने पत्रकारिता और जनसंचार में एम.ए., पत्रकारिता और जनसंचार अध्ययनशाला देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर, मध्यप्रदेश से किया है. रिपोर्टर के रूप में अपने करियर की शुरुआत करने वाली श्रुति ने अर्टिकल राइटर, कंटेंट राइटर, एंकर, स्क्रिप्ट राइटर, रेडियो जॉकी, ब्यूरो चीफ, समाचार सम्पादक, संपादक, कंटेंट मैनेजर, नेशनल हेड - इवेंट्स और जनसम्पर्क पदों पर रहते हुए अपनी कार्यकुशलता का परिचय दिया है. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण आदि समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में कार्य करने के साथ, आकाशवाणी (आल इंडिया रेडियो), कृषि जागरण, ग्रीन टी. वी., आर्यन टी. वी. नेशनल (साधना मीडिया प्राइवेट लिमिटेड, नोएडा )में भी कार्य किया है. लेखक और कवि होने के साथ ही श्रुति एंकर और व्यक्तित्व विकास प्रशिक्षक भी है. वर्तमान में एग्री संपर्क (डिजिटल संपर्क, नोएडा) में मुख्य संपादक और नेशनल हेड - इवेंट्स और जनसम्पर्क के पद पर कार्यरत हैं

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